गूंजी संगीत-लहरियां, हुआ फोटोग्राफी, नाट्य, पॉकेट थिएटर का विशेष प्रशिक्षण आज मंचित होंगे ये नाटक अमर कला महोत्सव-2026
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गूंजी संगीत-लहरियां, हुआ फोटोग्राफी, नाट्य, पॉकेट थिएटर का विशेष प्रशिक्षण
आज मंचित होंगे ये नाटक
गूंजी संगीत-लहरियां, हुआ फोटोग्राफी, नाट्य, पॉकेट थिएटर का विशेष प्रशिक्षण
आज मंचित होंगे ये नाटक
अमर कला महोत्सव-2026
कला एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान तथा पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के सहयोग से कल्पना संगीत एवं थिएटर संस्थान द्वारा प्रख्यात संगीतकार स्व. अमरचंद पुरोहित की स्मृति में तीन दिवसीय अमर कला महोत्सव 2026 के तीसरे संस्करण का शुभारंभ रविवार को टी.एम. ऑडिटोरियम में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान अध्यक्ष रामकुमार व्यास ने की।
दूसरे दिवस सोमवार को अपराह्न 3 बजे मास्टर तेजस जोशी का तबला वादन, श्री जैन पब्लिक स्कूल की नाट्य प्रस्तुति अग्नि पुत्री का मंचन भरत सिंह के निर्देशन में होगा। सायं 4ः30 बजे जोधपुर के बुंदू खाँ लंगा पार्टी द्वारा लोक गीतों की प्रस्तुतियां व सायं 7ः30 बजे गूंज कला एवं संस्कृति संस्थान द्वारा अनोप सिंह के निर्देशन में नाटक ‘‘टैडी और हम’’ का मंचन किया जाएगा।
रविवार को कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती की प्रतिमा के आगे दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ जिसमें वरिष्ठ रंग निर्देशक दयानंद शर्मा एवं चित्रकार डा मोना सरदार डूडी उपस्थित रहे।
इस प्रथम सत्र में उदयपुर एवं जयपुर से आए फोटोग्राफर राकेश शर्मा ‘राजदीप’ एवं अजय पारिख द्वारा फोटोग्राफी प्रशिक्षण, जयपुर के बाल रंग गुरु गगन मिश्रा द्वारा नाट्य प्रशिक्षण तथा पॉकेट थिएटर का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा चित्रकार मुकेश जोशी सांचीहर एवं कमल किशोर जोशी द्वारा पोटेर्ªट एवं पेंटिंग विधा पर प्रशिक्षण प्रारम्भ किया गया। इसके अलावा आॅडिटोरियम में विभिन्न कलाओं के प्रदर्शन के साथ बीकानेर के लगभग 50 कलाकारों की पेंटिंग, गोल्डन आर्ट कला एवं गोबर उत्पाद से बनाये हुए उत्पादों की प्रदर्शनी भी आयोजित हुई।
दूसरे सत्र में सखी ग्रुप की गायिकाओं द्वारा द्वारा सर्वप्रथम गणेश जी की आराधना एवं देवी का भजन प्रस्तुत किया गया। वीणा नृत्य अकादमी द्वारा श्रीमती वीणा जोशी के निर्देशन में मंच पर एकसाथ लगभग 30 नृत्यांगनाओं द्वारा कथक नृत्य प्रस्तुति तथा कलांजलि बैंगलुरु की ओर से सुश्री रूचि बालानी द्वारा भी कथक नृत्य प्रस्तुत किया गया। सुगम संगीत सरिता कार्यक्रम में गीत एवं गजलों की प्रस्तुति दी गई जिसमें सर्वप्रथम पं. पुखराज शर्मा द्वारा ‘‘गजल क्या तुझ पर नजम लिखूं’’, ‘‘दीवारों से बातें करना अच्छा लगता है’’ तथा बिंदु गोस्वामी का सगुण निर्गुण भेद पर आधारित भजन ‘‘संसार के करतार का आकार ना होता’’ सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इसी क्रम में पं. नारायण दास रंगा द्वारा ‘‘जब नाव जल में छोड़ दी तूफान में मोड़ दी’’, ‘‘दे दी चुनौती सिंधु को फिर क्या’’, एवं ‘‘म्हारा जन्म मरण रा साथी’’ गाकर श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। अंत में श्री राजनारायण पुरोहित द्वारा ‘‘बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी’’, ‘‘जीवन क्या है एक खिलौना है’’ और भूपेन हजारिका के असमिया गीत का हिन्दी रूपान्तरण ‘‘ओ गंगा बहती हो क्यों’’ गाकर इस संगीत संध्या को एक अत्यन्त ही समृद्ध एवं खुशनुमा समापन तक पहुंचाया। तबले पर ताहिर हुसैन, आॅर्गन पर अशद अली एवं पैड पर चांद सुलेमानी ने संगत दी।
तीसरे एवं अंतिम सत्र में कल्पना संस्थान के नाट्य दल द्वारा विपिन पुरोहित के निर्देशन में हास परिहास से भरे नाटक ‘‘दुश्मन उर्फ सैंया मगन पहलवानी में’’ का मंचन किया गया। मंच पर भरत राजपुरोहित ने हिम्मत सिंह, विपिन पुरोहित ने मामू, संजीव पुरोहित ने चेला गोली, गीतिका वालिया ने मां, पीहू ने लीला एवं भुवेश व दिव्यांश व जयवर्धन हर्ष ने बच्चों का किरदार निभाया।
उद्घाटन समारोह में वरिष्ठ रंगकर्मी एवं केंद्रीय साहित्य अकादमी की राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के संयोजक अर्जुन देव चारण, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी अनिल पांड्या विशिष्ट अतिथि, विरासत संवर्धन संस्थान के जतनलाल दुगड़, विनोद बाफना, हेमन्त मेहता, सोहनलाल चौधरी उपस्थित रहे।
समापन अवसर पर अमित कड़वासरा न्यायधीश एण्टी करप्सन ब्यूरो, चंद्रशेखर पारीक अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गजेन्द्र सिंह राठौड़ सहायक निदेशक अभियोजन, सुरेन्द्र बेनीवाल सहायक निदेशक अभियोजन, विमला कंवर अभियोजन अधिकारी, सीमा सोलंकी अभियोजन अधिकारी, दीपिका सिंह अभियोजन अधिकारी उपस्थित रहे।
स्वागत उद्बोधन अरूण पुरोहित ने किया। मंच संचालन हरीश बी शर्मा एवं जया पारीक ने किया।




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