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अमर कला महोत्सव : पहली बार हुई अमर काव्य धारा, पॉकेट थिएटर और प्रदर्शनी को अनेक लोगों ने सराहा


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*Khabaron Me Bikaner*
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✒️@Mohan Thanvi

अमर कला महोत्सव : पहली बार हुई अमर काव्य धारा, पॉकेट थिएटर और प्रदर्शनी को अनेक लोगों ने सराहा



 

Khabaron Me Bikaner


अमर कला महोत्सव : पहली बार हुई अमर काव्य धारा, पॉकेट थिएटर और प्रदर्शनी को अनेक लोगों ने सराहा

बीकानेर, 1 अप्रैल। कला एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान तथा पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर, विरासत संवर्धन संस्थान के सहयोग से कल्पना संगीत एवं थिएटर संस्थान द्वारा प्रख्यात संगीतकार स्व. अमरचंद पुरोहित की स्मृति में तीन दिवसीय अमर कला महोत्सव 2026 के तीसरे संस्करण के तीसरे दिन मंगलवार को स्थानीय टी.एम. ऑडिटोरियम, गंगाशहर, बीकानेर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए।

प्रथम सत्र में नाटक के प्रशिक्षणार्थियों को जयपुर से आए गगन मिश्रा द्वारा पॉकेट थिएटर का अभ्यास करवाया गया, जो कि कोरोना काल के समय गगन मिश्रा द्वारा किया गया एक प्रयोगात्मक फॉर्म है।
पॉकेट थिएटर की सोच का जन्म उस समय हुआ, जब प्रोसेनियम सभागार और अन्य सभी हॉल बंद थे। तब टीम क्यूरिया चिल्ड्रंस थिएटर की ओर से उन्होंने अपने नियमित फॉलोअप चिल्ड्रंस थिएटर में क्यूरियो के कुछ चयनित बच्चों के साथ ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से वर्कशॉप आयोजित की। लगभग डेढ़ माह में “सिक्स मस्कटियर थिएटर इन एजुकेशन” प्रस्तुति तैयार कर जयपुर के 6-7 स्थानों—जैसे पब्लिक पार्क, विभिन्न कॉलोनियों के घरों के ड्रॉइंग रूम—में प्रस्तुतियां दी गईं। इस प्रकार पॉकेट थिएटर एक सृजनात्मक मंच के रूप में विकसित हुआ।

पॉकेट थिएटर की विशेषता यह है कि इसमें बिना साउंड, लाइट एवं तकनीकी संसाधनों के, सहज अभिनय के माध्यम से सीमित स्थान में प्रस्तुति दी जाती है। इसमें नाटकीय घटनाक्रम की बाध्यता नहीं होती, बल्कि कलाकार दर्शकों के अत्यंत निकट रहकर प्रस्तुति देते हैं, जिससे दर्शक किसी भी कोने में बैठकर एक आत्मीय अनुभव प्राप्त करते हैं।

दूसरे सत्र में अपराह्न 1:30 बजे अंतरराष्ट्रीय सुमेरू भजन गायक जितेंद्र सारस्वत ने अपने भजनों की प्रस्तुति दी। उन्होंने ‘शिवा-शिवा’, ‘चौक पुरावों’ आदि भजन प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया और दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की।

इसके पश्चात वरिष्ठ साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी एवं कमल किशोर रंगा के सानिध्य में “अमर काव्य धारा” का आयोजन हुआ, जो इस महोत्सव का विशेष आकर्षण रहा। इस दौरान रचनाकार हरिशंकर आचार्य, कृष्णा आचार्य, मोनिका गौड़, बाबूलाल छंगाणी, मनीषा आर्य सोनी, इरशाद अज़ीज़, बुनियाद हुसैन जहीन एवं विप्लव व्यास ने अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर सभागार में काव्य के विविध रंग बिखेर दिए।

अंतिम सत्र में रसधारा सांस्कृतिक संस्थान, भीलवाड़ा की ओर से अनुराग सिंह राठौड़ के निर्देशन एवं गोपाल आचार्य के मार्गदर्शन में राजस्थानी नाटक “कठपुतलियाँ” का मंचन किया गया। नाटक का कथासार एक कठपुतली कलाकार रामककशन के जीवन पर आधारित है, जो पत्नी के निधन के बाद अपने छोटे बच्चे का पालन-पोषण करता है। परिस्थितिवश सुगना से उसका विवाह होता है, जो अपने पूर्व प्रेम को भूल नहीं पाती, लेकिन रामककशन के धैर्य, संवेदनशीलता और सरल स्वभाव से उसके अंतर्मन में परिवर्तन आता है। नाटक के माध्यम से मानवीय संबंधों, भावनाओं और जीवन मूल्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।

नाटक में कुलदीप सिंह, शिवांगी, दुष्यंत हरित, गरिमा सिंह, दीपक, अंशु, हरिसिंह, जगदीश प्रसाद, प्रभु प्रजापत, विभूति, अंकित शाह, दिनेश चौधरी, राहुल, महेश एवं अनिमेष ने अभिनय किया। मंच सज्जा हर्षित एवं के.जी. कदम, प्रकाश प्रभाव रवि ओझा तथा संगीत संयोजन रवि यादव का रहा।

तीन दिवसीय महोत्सव में लगभग 300 प्रतिभागियों ने विभिन्न विधाओं में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लिया, जिन्हें प्रमाण पत्र एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।

समापन अवसर पर विनोद कुमार बाफना (अध्यक्ष, वैश्य महासभा), समाजसेवी के.के. मेहता, वरिष्ठ साहित्यकार बुलाकी शर्मा एवं कोलायत उपखंड अधिकारी राजेश कुमार उपस्थित रहे।

संस्थान अध्यक्ष रामकुमार व्यास ने समापन उद्बोधन देते हुए सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया तथा अगले वर्ष चतुर्थ अमर कला महोत्सव के आयोजन की घोषणा की। अंत में राजकुमार पुरोहित ने धन्यवाद ज्ञापित किया। विभिन्न सत्रों का संचालन भरतसिंह, जया पारिक, मोनिका गौड़ एवं हरीश बी. शर्मा ने किया।

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