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✒️@Mohan Thanvi
‘उछब थरपणा’ : चंदा, साफा-पाग और सांस्कृतिक परंपरा की महत्ता बताई
दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न
‘उछब थरपणा’ : चंदा, साफा-पाग और सांस्कृतिक परंपरा की महत्ता बताई
दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न
हमें हमारी परंपरागत कला धरोहर को संजोए रखना होगा-कमल रंगा
बीकानेर
नगर स्थापना 538वें नगर स्थापना दिवस के अवसर पर दो दिन 09 और 10 अप्रैल, 2026 को ‘उछब थरपणा’ के तहत आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला
पहले दिन :-: चंदा, साफा-पाग हमारी पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है। बीकानेर की इसी समृद्ध कला धरोहर को हमें संजोए रखना होगा। यह उद्गार राजस्थानी साफा-पाग पगड़ी एवं कला संस्थान और थार विरासत द्वारा कार्यशाला के उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने व्यक्त किए।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कला विशेषज्ञ डॉ राकेश किराडू ने परंपरागत कलाओं के बारे में बताते हुए कहा कि बीकानेर हमेशा अन्य क्षेत्रों की तरह ही कला जगत में अपना महत्वपूर्ण मुकाम रखता है। कार्यशाला के प्रभारी वरिष्ठ कला विशेषज्ञ मोना सरदार डूडी ने कहा कि युवा पीढ़ी उसमें भी विशेष तौर बालिकाओं द्वारा अपनी परंपरागत कला के प्रति रूचि होना शुभ संकेत है। समारोह के समन्वयक वरिष्ठ चंदा पाग-पगड़ी विशेषज्ञ कृष्णचन्द पुरोहित ने भी विचार रखे।
दूसरे दिन
सभ्यता और संस्कृति की प्रतीकात्मक स्वरूप साफा पगड़ी का अवलोकन, प्रशिक्षण के साथ व्याख्यान दिया गया। जिसमें मुख्य अतिथि राजेश रंगा, विशिष्ट अतिथि हंसराज देवडा थे।
मोहित पुरोहित, गोपीकिशन छंगाणी, हरिनारायण आचार्य, गौरीशंकर व्यास, धर्मेन्द्र छंगाणी, भवानी सिंह राठौड़, नवनीत व्यास, मनमोहन पालीवाल, अशोक शर्मा, मरूधरा बोहरा
जयश्री सुथार , मीनाक्षी पुरोहित, आदित्य पुरोहित, केशव ओझा, वासु व्यास, मयंक व्यास,हरि उपाध्याय, तपेश सुथार, बाबू स्वामी, प्रियांशु स्वामी, डूगू सुथार, आदि उपस्थित थे।
सहित गणमान्यों की गरिमामय साक्षी रही।




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