Subscribe Us

test

लक्ष्मीनारायण रंगा का साहित्य सदैव प्रासंगिक एवं कालजयी रहेगा-रवि पुरोहित लक्ष्मीनारायण रंगा मानवीय चेतना के सशक्त पैरोकार रहे-जाकिर अदीब




मंगलकामनाएं / धर्म, साहित्य और संस्कृति *Khabaron Me Bikaner*


*Khabaron Me Bikaner*
13 अक्टूबर 2025 सोमवार

Khabaron Me Bikaner


✒️@Mohan Thanvi

लक्ष्मीनारायण रंगा का साहित्य सदैव प्रासंगिक एवं कालजयी रहेगा-रवि पुरोहित

लक्ष्मीनारायण रंगा मानवीय चेतना के सशक्त पैरोकार रहे-जाकिर अदीब

 

Khabaron Me Bikaner


लक्ष्मीनारायण रंगा का साहित्य सदैव प्रासंगिक एवं कालजयी रहेगा-रवि पुरोहित

लक्ष्मीनारायण रंगा मानवीय चेतना के सशक्त पैरोकार रहे-जाकिर अदीब

बीकानेर 12 अक्टूबर 2025
प्रज्ञालय संस्थान द्वारा देश के ख्यातनाम साहित्यकार, रंगकर्मी, चिंतक एवं शिक्षाविद् कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा की 92वीं जयंती के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय ‘सृजन सौरम-हमारे बाऊजी’ समारोह के दूसरे दिन उन्हें समर्पित काव्य रंगत का आयोजन लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन सदन में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि-संपादक रवि पुरोहित ने कहा कि लक्ष्मीनारायण रंगा का साहित्य सदैव प्रासंगिक एवं कालजयी रहेगा, क्योंकि उनका संपूर्ण सृजन संजीदा-संवेदनशील तो था ही साथ ही आप मानवता के प्रबल पैरोकार बनकर अपने पाठकों से रागात्मक रिश्ता बनाते है। पुरोहित ने कहा कि जब उनके साहित्य के माध्यम से संभावनाओं, भविष्य से संभावित मूल्यों, आगत की चुनौतियों को शामिल कर समाधान के रास्ते तलाशे एवं सुझाए जाते है, तब वह मौलिक साहित्य सृजना की श्रेणी पाने योग्य होता है। इस अवसर पर उन्होंने ऐसे आयोजन के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रज्ञालय संस्थान की प्रशंसा की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ शायर जाकिर अदीब ने लक्ष्मीनारायण रंगा के समृद्ध साहित्य को प्रेरणादायी बताते हुए उनकी साहित्य साधना को मानवीय चेतना का सशक्त पैरोकार बताया लक्ष्मीनारायण रंगा ने साहित्य की सभी विधाओं में विपुल सृजन कर कीर्तिमान स्थापित किया। उनकी स्मृति में ऐसे महत्वपूर्ण आयोजन से नगर की साहित्यक परंपरा को बल मिलता है। जिसके लिए प्रज्ञालय संस्थान एवं रंगा परिवार साधुवाद के पात्र है।
इस अवसर पर राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने लक्ष्मीनारायण रंगा के काव्य रचना संसार को अनुभव-अनुभूति एवं सवेदनाओं का सच्चा तलपट बताया क्योंकि उनकी रचनाएं उदात्त चिन्तन के साथ नव बोध-नव संदर्भ एवं समसामयिक विषयों पर केन्द्रित है।
लक्ष्मीनारायण रंगा को समर्पित ‘काव्य रंगत’ में तीन भाषा-तीन पीढ़ी के तीन रंगो के साथ प्रमुख रूप से जाकिर अदीब, रवि पुरोहित, कमल रंगा, प्रमोद शर्मा, डॉ गौरीशंकर प्रजापत, मनीषा आर्य सोनी, डॉ. कृष्णा आचार्य, पुनीत कुमार रंगा, जुगल किशोर पुरोहित, कासिम बीकानेरी, सुमित रंगा, डॉ. नृसिंह बिन्नाणी, मधुरिमा सिंह, सागर सिद्दकी, राजाराम स्वर्णकार, कैलाश टाक, इन्द्रा व्यास, गिरिराज पारीक, गंगाबिशन बिश्नोई, आनन्द छंगाणी, हरि किशन व्यास, पीतांबर सोनी, मदनगोपाल व्यास, अब्दुल शकूर सहित नगर के हिन्दी, उर्दू एवं राजस्थानी के कवि शायरों ने समकालीन संदर्भ एवं नव बोध के साथ वर्तमान हालातों एवं समसामयिक विषयांे पर अपनी काव्य प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रारंभ में सभी का स्वागत गिरिराज पारीक ने करते हुए इस महत्वपूर्ण आयोजन के बारे में बताते हुए रंगाजी से जुडे़ कई संस्मरण साझा किए।
 ‘सृजन सौरम हमारे बाऊजी’ समारोह में गरिमामय साक्षी के रूप में डॉ. अजय जोशी, आत्माराम भाटी, राजेश रंगा, योगेन्द्र पुरोहित, गोपाल कुमार व्यास, महेन्द्र जोशी, बी. एल. नवीन डॉ फारूख चौहान, अविनाश व्यास, घनश्याम सिंह, रमेश हर्ष, डॉ. तुलसीराम मोदी, शिव प्रकाश शर्मा, आशीष रंगा, अरूण व्यास, राहुल आचार्य, रूद्र प्रताप, भवानी सिंह, मदन जैरी, अशोक शर्मा, अंकित रंगा, कार्तिक मोदी, अख्तर अली, तोलाराम सारण, घनश्याम ओझा, चंपालाल गहलोत, कन्हैयालाल पंवार, भैरूरतन, जीवणलाल सहित अनेक गणमान्यों की रही। संभागियों ने लक्ष्मीनारायण रंगा के तेलचित्र पर अतिथियों के साथ प्रारंभ में पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें एवं उनकी साहित्यिक सृजना को नमन किया।
 कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ शायर कासिम बीकानेरी ने किया एवं सभी का आभार वरिष्ठ शिक्षाविद् राजेश रंगा ने ज्ञापित किया।

No comments:

Powered by Blogger.